Saturday, April 25, 2009

महखाना और सिर

वो महखाने में आया

अपना सिर मेज़ पे रखा

सेवादार को हुकुम दिया

फिर गलास्सी उठाई

एक पैग

दो पैग

तीन

फिर पता नही कितने

जब उसको लगा

के उसका सीना अब पुरजोर है

तो उसने मेज़ पर

इधर उधर हाथ मारा

और मेज़ पर पड़ा

किसी और का सिर

उठाकर

अपने घर लौट गया

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